दिल्ली में बाढ़ और जलभराव से निपटने के लिए ₹622 करोड़ की परियोजनाओं को मंजूरी*

यमुना किनारे 4.7 किलोमीटर लंबी RCC दीवार बनेगी, नालों से निकलने वाली गाद के वैज्ञानिक निस्तारण के लिए ₹260 करोड़ की बायोमाइनिंग परियोजनाएं

दिल्ली में बाढ़ और जलभराव से निपटने के लिए ₹622 करोड़ की परियोजनाओं को मंजूरी*
दिल्ली में बाढ़ और जलभराव से निपटने के लिए ₹622 करोड़ की परियोजनाओं को मंजूरी*
मुख्य बातें

यमुना किनारे 4.7 किलोमीटर लंबी RCC दीवार बनेगी, नालों से निकलने वाली गाद के वैज्ञानिक निस्तारण के लिए ₹260 करोड़ की बायोमाइनिंग परियोजनाएं 40वीं फ्लड कंट्रोल बोर्ड की बैठक में दिल्ली के नालों के किनारे बरापुला की तर्ज पर सौंदर्यीकरण पर भी चर्चा

  • यमुना किनारे 4.7 किलोमीटर लंबी RCC दीवार बनेगी, नालों से निकलने वाली गाद के वैज्ञानिक निस्तारण के लिए ₹260 करोड़ की बायोमाइनिंग परियोजनाएं
  • 40वीं फ्लड कंट्रोल बोर्ड की बैठक में दिल्ली के नालों के किनारे बरापुला की तर्ज पर सौंदर्यीकरण पर भी चर्चा
  • नई दिल्ली, 23 अक्टूबर 2026।

यमुना किनारे 4.7 किलोमीटर लंबी RCC दीवार बनेगी, नालों से निकलने वाली गाद के वैज्ञानिक निस्तारण के लिए ₹260 करोड़ की बायोमाइनिंग परियोजनाएं

40वीं फ्लड कंट्रोल बोर्ड की बैठक में दिल्ली के नालों के किनारे बरापुला की तर्ज पर सौंदर्यीकरण पर भी चर्चा

नई दिल्ली, 23 अक्टूबर 2026। दिल्ली के सिंचाई एवं बाढ़ नियंत्रण मंत्री श्री प्रवेश साहिब सिंह की अध्यक्षता में आज दिल्ली सचिवालय में सिंचाई एवं बाढ़ नियंत्रण विभाग के फ्लड कंट्रोल बोर्ड की 40वीं बैठक आयोजित की गई। बैठक में दिल्ली की जल निकासी और बाढ़ प्रबंधन व्यवस्था को मजबूत करने के लिए ₹622 करोड़ की परियोजनाओं को मंजूरी दी गई।

बैठक में जलभराव की समस्या के स्थायी समाधान, नालों से निकाली जाने वाली गाद के वैज्ञानिक निस्तारण, ड्रेनेज इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत करने और मानसून की बेहतर तैयारियों पर विशेष ध्यान दिया गया।

यमुना किनारे 4.7 किलोमीटर लंबी RCC दीवार

बोर्ड ने मैगजीन रोड नाले से ओल्ड रेलवे ब्रिज तक यमुना के संवेदनशील हिस्से में ₹99 करोड़ की लागत से 4.7 किलोमीटर लंबी प्रबलित सीमेंट कंक्रीट (RCC) दीवार बनाने को मंजूरी दी। इससे यमुना का जलस्तर बढ़ने के दौरान निचले इलाकों को सुरक्षा प्रदान करने में मदद मिलेगी।

गाद के निस्तारण के लिए ₹260 करोड़ की बायोमाइनिंग परियोजनाएं

दिल्ली में हर साल नालों की सफाई और डी-सिल्टिंग के दौरान बड़ी मात्रा में गाद निकाली जाती है। लेकिन इस गाद का उचित निस्तारण लंबे समय से एक बड़ी चुनौती रहा है। वैज्ञानिक निस्तारण की व्यवस्था नहीं होने के कारण कई बार निकाली गई गाद नालों के किनारे या सड़कों पर पड़ी रहती है और बारिश के दौरान दोबारा नालों में पहुंच जाती है। इससे सफाई के प्रयासों पर भी असर पड़ता है।

इस समस्या के स्थायी समाधान की दिशा में बोर्ड ने दिल्ली के विभिन्न नालों से निकलने वाली गाद के वैज्ञानिक प्रसंस्करण और निस्तारण के लिए ₹260 करोड़ की लागत वाली तीन बायोमाइनिंग परियोजनाओं को सैद्धांतिक मंजूरी दी। इन परियोजनाओं से विशेष रूप से नजफगढ़ नाले सहित दिल्ली के उन प्रमुख नालों को लाभ होगा, जहां गाद का जमाव अधिक होता है।

बरापुला की तर्ज पर नालों के किनारे होगा सौंदर्यीकरण

बैठक में दिल्ली के विभिन्न नालों के किनारे बरापुला की तर्ज पर सौंदर्यीकरण और विकास कार्य करने पर भी चर्चा की गई। इसके तहत नालों के किनारे पैदल चलने के लिए रास्ते, हरित क्षेत्र, पौधारोपण, उचित प्रकाश व्यवस्था और सुरक्षा के लिए फेंसिंग विकसित करने की योजना है।

इस पहल का उद्देश्य नालों के आसपास उपेक्षित और अतिक्रमण की आशंका वाले क्षेत्रों को स्वच्छ, सुरक्षित और जनोपयोगी स्थानों में बदलना है।

बैठक के बाद श्री प्रवेश साहिब सिंह ने कहा, “नालों की गाद निकालने का कोई मतलब नहीं है, अगर वही गाद वापस नालों में पहुंच जाए। वर्षों से यही समस्या बनी हुई थी। बायोमाइनिंग के माध्यम से गाद का वैज्ञानिक तरीके से निस्तारण किया जाएगा, ताकि इस समस्या का स्थायी समाधान सुनिश्चित किया जा सके।”

उन्होंने कहा, “हमारे नाले गंदगी और बदहाली की पहचान नहीं, बल्कि बेहतर शहरी विकास का हिस्सा बनने चाहिए। बरापुला में जिस तरह नाले के किनारे के क्षेत्र को विकसित किया गया है, उसी तर्ज पर दिल्ली के अन्य नालों के किनारों को भी हरा-भरा, स्वच्छ और सुरक्षित बनाने की दिशा में काम किया जाएगा।”

मंत्री ने अधिकारियों को सभी कार्य निर्धारित समय-सीमा के भीतर पूरा करने तथा परियोजनाओं की नियमित निगरानी सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।

दिल्ली में बाढ़ और जलभराव से निपटने के लिए ₹622 करोड़ की परियोजनाओं को मंजूरी*

प्रकाशित: शनिवार, 24 अक्टूबर 2026 | 6:40 PM IST

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