भारत में पेट्रोल-डीजल और जरूरी सामान महंगे होने की आशंका

ग्लोबल जियो-पॉलिटिकल टेंशन ने तेल बाजार में उबाल ला दिया है.

भारत में पेट्रोल-डीजल और जरूरी सामान महंगे होने की आशंका
भारत में पेट्रोल-डीजल और जरूरी सामान महंगे होने की आशंका
मुख्य बातें

ग्लोबल जियो-पॉलिटिकल टेंशन ने तेल बाजार में उबाल ला दिया है. ब्रेंट क्रूड मई के बाद पहली बार 110 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गया.

  • ग्लोबल जियो-पॉलिटिकल टेंशन ने तेल बाजार में उबाल ला दिया है.
  • ब्रेंट क्रूड मई के बाद पहली बार 110 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गया.
  • महंगा कच्चा तेल पेट्रोल-डीजल से लेकर परिवहन और रोजमर्रा की वस्तुओं की कीमतों पर दबाव बढ़ा सकता है.

ग्लोबल जियो-पॉलिटिकल टेंशन ने तेल बाजार में उबाल ला दिया है. ब्रेंट क्रूड मई के बाद पहली बार 110 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गया. महंगा कच्चा तेल पेट्रोल-डीजल से लेकर परिवहन और रोजमर्रा की वस्तुओं की कीमतों पर दबाव बढ़ा सकता है.

मिडिल ईस्‍ट और पूर्वी यूरोप में चल रही जियो-पॉलिटिकल टेंशन के कारण शुक्रवार को ग्‍लोबल कच्‍चे तेल की कीमतों में बड़ी उछाल देखने को मिली. 16 अक्‍टूबर को ब्रेंट क्रूड ऑयल मई के बाद पहली बार 110 डॉलर प्रति बैरल के हाई पर पहुंच गया, लेकिन बाद में यह गिरकर 109.86 डॉलर पर बंद हुआ.

वहीं अमेरिकी वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट (WTI) 3.5% बढ़कर 101.41 डॉलर प्रति बैरल पर बंद हुआ. सप्ताह के दौरान, WTI में 10% से अधिक की तेजी देखने को मिली है, जबकि ब्रेंट में लगभग 5% की बढ़ोतरी दर्ज की गई है. ऐसे में एक्‍सपर्ट्स महंगाई के तेज बढने जैसे खतरे की आशंका जता रहे हैं, जिसका असर भारत पर भी पड़ने की संभावना दिख रही है.

यह बढ़ोतरी ऐसे वक्‍त में हुई है, जब एकसाथ ऊर्जा के महत्‍वपूर्ण गलियारों जैसे स्‍ट्रेट ऑफ होर्मुज और बाब अल मंडेब में खतरा एक साथ आने से कीमतों में तेज बढ़ोतरी हुई है. मिडिल ईस्‍ट में ईरान ने होर्मुज में हमले तेल कर दिए, जिससे इस महत्‍वपूर्ण समुद्री रास्‍तों से कमर्शियल जहाजों और पेट्रोलियम परिवहन में गंभीर बाधा पैदा हुई.

दूसरी ओर, क्षेत्रीय दबावों को और बढ़ाते हुए हुतियों ने सऊदी अरब पर मिसाइलें दागीं, जिससे प्रमुख क्षेत्रीय उत्पादन और निर्यात अवसंरचना की सुरक्षा को लेकर चिंताएं बढ़ गईं. इसी दौरान, पूर्वी यूरोप में चल रहे संघर्ष ने ऊर्जा बाजारों को भारी उछाल दिया, क्योंकि यूक्रेन ने रूसी रिफाइनरियों पर हमले जारी रखने की कसम खाई थी. इन सभी तत्‍कालीन घटनाओं के एकसाथ होने की वजह से तेल की कीमतों में तेज उछाल देखने को मिला.

बड़े खतरे का अंदेशा

एनर्जी एक्‍सपर्ट्स का कहना है कि अचानक से कच्‍चे तेल का 3 डिजिट में पहुंचना ग्‍लोबल महंगाई पर दबाव है. दुनिया भर में महंगाई का खतरा अचानक से बढ सकता है, जिससे खुदरा ईंधन लागत, विनिर्माण लागत और परिवहन व्यय पर दुनिया भर में असर पड़ेगा. वहीं बाजार लंबे समय तक अस्थिर रह सकते हैं.

भारत पर क्‍या होगा असर?

एक्‍सपर्ट्स का यह भी कहना है कि अगर लंबे समय तक तेल की कीमतें इतने उच्‍च स्‍तर पर रहती हैं तो भारत पर भी इसका गंभीर प्रभाव पड़ सकता है. पेट्रोल-डीजल के दाम बढ़ सकते हैं, ट्रांसपोर्ट लागत भी बढ़ जाएगा, जिससे मैन्‍युफैक्‍चरिंग कंपनियां अपने प्रोडक्‍ट्स के दाम बढा सकती है. ओभरऑल भारत पर भी महंगाई हावी हो सकती है, क्‍योंकि भारत अपने जरूरत का ज्‍यादातर एनर्जी कच्‍चे तेल से पूरा करता है और दूसरे देशों से ही आयात करता है.

भारत में पेट्रोल-डीजल और जरूरी सामान महंगे होने की आशंका

प्रकाशित: रविवार, 18 अक्टूबर 2026 | 9:01 AM IST

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